विषय क्या है प्रकार, मुख्य भाग

by | 8 January 2021 | 0 comments

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विषय क्या है : प्रकार, मुख्य भाग ,

जैसा कि हमें मालूम है विषय एक हिंदी भाषा का शब्द है विषय का अर्थ किसी एक जैसे वस्तु या बातों का होना है जैसा कि हम जानते हैं कि गढ़ना से जुड़े हुए मामलों को गणित विषय में रखा गया है और नए अविष्कार या उत्पत्ति से जुड़े हुए मामलों को विज्ञान के विषय में रखा गया है अतः लोगों से संबंधित मामलों को भी विषयों की श्रेणी मैं रखना ही विषय कहलाता है

अनेक प्रकार के होते हैं

जैसे: हिंदी विषय, अंग्रेजी विषय, इत्यादि शिक्षा क्या है पढ़े 

कुछ मुख्य भाग भी होते हैं

जैसे: घरेलू विषय, सामाजिक विषय, राष्ट्रीय विषय, अंतर्राष्ट्रीय विषय जो निम्नलिखित है

हिंदी विषय:

हम जानते हैं हिंदी विश्व की मुख्य भाषा है और भारत देश की राजभाषा है केंद्रीय स्तर पर भारत देश में इसे प्रथम श्रेणी में रखा गया है जिस विषय में कहानी लेखन और कविताओं का वर्णन किया जाता है वह हिंदी विषय कहलाता है

अंग्रेजी विषय:

ऐसा माना जाता है की अंग्रेजी विषय की उत्पत्ति 15 वी शताब्दी में हुई थी इस विषय को एल्गो सेक्शन लोगों द्वारा इंग्लैंड से लाई गई थी इस प्रकार से नर्मन विजय के बाद ही मुख्य रूप से अंग्रेजी विषय की शुरुआत हुई इंटरनेट क्या है जानने के लिये क्लिक करे 

घरेलू विषय:

विषय के अंतर्गत हम घरेलू सामग्रियों और घरेलू उपकरणों के बारे में बात करते हैं वह घरेलू विषय कहलाता है घरेलू विषय का संबंध घर से होता है जैसा कि हम जानते हैं घर की देखभाल करना और घरेलू सामानों को सही तरीके से सजा कर और संभाल कर रखने वाला विषय घरेलू विषय कहलाता है परंतु किसी भी व्यक्ति का इस प्रकार से समझना ही आंशिक रूप से सत्य होता है क्योंकि घरेलू क्षेत्र काफी बड़ा और विस्तृत होता है इस विषय का दायरा सिर्फ घर तक ही नहीं बल्कि बाहर तक फैला होता है घरेलू विषय का मतलब केवल खाना बनाना कपड़ा धोना घर को सही तरीके से सजाकर रखना सिलाई कढ़ाई करना कपड़ा धोना आदि तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह विषय युवा विद्यार्थियों के जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण लक्ष्य के लिए तैयार करना होता है जिससे कि व्यक्ति अपने घर परिवार की देखभाल और अपने जीवन में किसी भी तरह से प्रयोग कर सकता है जैसा कि हम जानते हैं वर्तमान समय में महिला और पुरुष दोनों ही घरेलू विषय को बहुत ही अच्छे तरीके से जानते और समझते हैं और इसी प्रकार से व्यक्ति अपने जीवन को सुख में बनाने की कोशिश में लगा रहता है और वह अपने पास उपलब्ध संसाधनों के उपयोग की तैयारी में भी बराबरी से निभाता है इस प्रकार की सभी बातें घरेलू विषय के अंतर्गत आता है

सामाजिक विषय:

सामाजिक विषय एक सामान्य विषय है सामाजिक विषय के अंतर्गत समाज से जुड़ी हुई सामाजिक मुद्दा या सामाजिक समस्या आता है सामाजिक विषय के रूप में समाजशास्त्र के उद्भव विकास एवं परिवर्तन पृष्ठ में सामाजिक विषय की अवधारणा महत्वपूर्ण भूमिका का के रूप में निभाता है सामाजिक विषय का समस्या मूलक वातावरण और परिस्थितियों का ज्ञान कराना है सामाजिक विषय कहलाता है सामाजिक विषय के अध्ययन में समाज से जुड़ी हुई हर समस्याओं के अध्ययन में सामाजिक विचारों को को ध्यान से और सहज रूप से रखा जाता है जैसा कि हम जानते हैं सामाजिक जीवन का अविभाज्य अंग सामाजिक विषय होता है मानव समाज में कभी भी सामाजिक विषयों से मुक्त नहीं हो सकता है और ना ही सामाजिक विषयों से दूर रहने की संभावना होती है इस प्रकार यह निश्चित है कि वर्तमान समय में भी आधुनिक विद्यमान संचार की क्रांति और शिक्षा के प्रति लोगों की जागरूकता के रूप में मनुष्य हर समस्याओं के प्रति संवेदनशील और सहज हो जाता है सामाजिक विषयों के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ने रखता है तथा जनसंचार के माध्यम जैसे कि टेलीविजन अखबार और रेडियो का भी सामाजिक विषय में महत्वपूर्ण योगदान होता है सामाजिक समस्याओं का संबंध सामाजिक विषय के अंतर्गत गत्यात्मक एवं परिवर्तनशील विषय से संबंध रखता है

राष्ट्रीय विषय:

जैसा कि हम सभी जानते हैं राष्ट्रीय विषय का आशय किसी भी देश के आर्थिक और राजनैतिक सैनिक सम सांस्कृतिक लक्ष्यों और महत्वकांक्षी से होता है राष्ट्रीय विषय का अर्थ राष्ट्रहित होता है राष्ट्रीय विषय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है जैसा कि सभी राज्यों के आपसी संबंध बनाने में राष्ट्रीय विषय की विशेष भूमिका होती है किसी भी राष्ट्र को नीति और राष्ट्रीय हितों पर आधारित होना होता है अतः किसी राष्ट्र की सफलता और असफलता का मूल्यांकन भी राष्ट्रीय विषय के अंतर्गत आता है जिसके परिणाम में नीतियों का बदलना भी राष्ट्रीय विषय कहलाता है राष्ट्रीय हित राष्ट्रीय विषय के अंतर्गत व्यापक दीर्घकालीन एवं उद्योग पर आधारित होती है जिन की प्राप्ति करने के लिए सभी राज्य व राष्ट्र और सरकार में सब अपने आप को प्रयत्नशील पाते हैं राष्ट्रीय विषय के संदर्भ में जो भी बातें कहीं जाती हैं अनंत तक यह सत्य होता है कि सभी राष्ट्र राष्ट्रीय विषय के अभिवृद्धि हेतु पूर्ण रूप से प्रयत्नशील होते हैं राष्ट्रीय विषय के संदर्भ में राष्ट्र के विभिन्न साधनों का उपयोग किया जाता है कोई भी राष्ट्र किसी विदेश नीति का कार्यकाल के माध्यम से होता है अपने राज्य के लिए वृद्धि एवं पूर्ति का महत्वपूर्ण रूप से राष्ट्रीय विषय कहलाता ह

अंतरराष्ट्रीय विषय:

सामान्य शब्दों में अंतर्राष्ट्रीय विषय का अर्थ राज्यों के बीच राजनीति करना होता है जैसा की राजनीति के अर्थ का अपने राज्य से होता है जैसा कि अपने राष्ट्र के विषय में अध्ययन करना और अपने राष्ट्र के लिए प्रयासरत रहना अंतरराष्ट्रीय विषय के अंतर्गत आता है हम इसे परंपरागत मान सकते हैं कि अंतरराष्ट्रीय का स्थान सबसे व्यापक अवधारणा अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से लिया गया है जिसके अंतर्गत सभी राज्य परस्पर संघर्ष के साथसाथ सहयोग के पहलुओं को भी पूर्ण रूप से अंतर्राष्ट्रीय विषय का क्षेत्र बताया गया है अतः अंतर्राष्ट्रीय विषय के अंतर्गत आज व्यक्ति संस्था संगठन तथा अन्य जैसे कि राज्य की कहानियां भी अंतर्राष्ट्रीय विषय में सम्मिलित है जैसा कि वर्तमान समय में आधार व विषय क्षेत्र का व्यापक रूप से अंतर्राष्ट्रीय विषय में ले लिया गया है और सभी विषयों पर अलगअलग विद्वानों के द्वारा अलगअलग परिभाषाएं भी दी गई हैं

Author  <a href="https://sarkariresulta.com/author/anupam-verma/" target="_self">Anupam Verma</a> ⪼ ✅

Author Anupam Verma ⪼ ✅

Anupam Verma is an education expert who has a passion for writing articles on education and education policies. In his spare time, he likes to write articles on SarkariResulta

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