राज्यपाल के कार्य और शक्तिया

by | 14 January 2021 | 0 comments

राज्यपाल: के कार्य और शक्तिया

अनुच्छेद 153 के अनुसार सभी राज्य का राज्यपाल होना आवश्यक है राज्य के कार्यकारी के तहत राज्यपाल, मंत्रिपरिषद और राज्य के महाधिवक्ता होते हैं। राज्यपाल भी राज्य का मुख्य कार्यकारी के रूप में होता है जो अपने कार्य के लिये राज्य के मंत्रियों से सलाह लेता है| इसके अलावा, राज्यपाल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर दो भूमिका निभाता है| इसे राष्ट्रपति के आदेश पर पांच वर्षों के लिए नियुक्त किया जाता है परन्तु वह राष्ट्रपति के प्रसाद उपरांत ही अपने पद पर रह सकता है| भारतीय संविधान की महत्वपूर्ण जानकारी

राज्यपाल की नियुक्ति

राज्यपाल को नियुक्त करने के लिये योग्यताए (अनुच्छेद 157) –

संविधान में राज्यपाल को नियुक्त किए जाने के लिए महत्पूर्ण योग्यताए

  • वह भारत का नागरिक हो

  • इस पद के लिये 35 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो|

  • पद प्राप्त करने वाला राज्य के बाहर का व्यक्ति होना चाहिए जिससे वह स्थानीय राजनीति में लिप्त ना हो|

  • एक ही व्यक्ति अधिक से अधिक 2 राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जाता है, जिसके लिये उसे दोनों राज्यों की तनख्वाह दी जाती है

  • राज्यपाल की उपल्बधिया और भत्तेउसके पद पर रहने के दौरान कम नहीं किये जा सकता

राज्यपाल के अधिकार निम्न है

देश के राज्यों के राज्यपाल के पास कार्यकार न्यायिक अधिकार होते है | लेकिन भारत के राष्ट्रपति की तरह कूटनीतिक, सैन्य या आपातकालीन अधिकार नहीं होता है

राज्यपाल की अधिकार और कार्य को वर्गीकृत किये जा सकते है:

  • कार्यकारी अधिकार

  • विधायी अधिकार

  • वित्तीय अधिकार

  • न्यायिक अधिकार

कार्यकारी अधिकार

जैसा आपको बताया गया कि कार्यकारी अधिकार उस अधिकारों को कहा जाता है जिसका प्रयोग राज्यपाल के नाम पर मंत्री द्वारा किया जाता है| इसलिए मंत्री वास्तविक कार्यकारी होता हैं। राज्यपाल कार्यकाल के दौरान अपने पद पर रहते हैं: राज्य मुख्यमंत्री के सलाह पर राज्य के अन्य मंत्री , महाधिवक्ता। वह राष्ट्रपति से एक राज्य में संवैधानिक आपातकाल लगाने की सिफारिश भी कर सकता है । राष्ट्रपति शासन की अवधि के दौरान, राज्यपाल को राष्ट्रपति के व्यापक कार्यकारी अधिकार प्राप्त होते है।

विधायी अधिकार

दो भागो में बता गया है राज्यपाल के अधिकार बिल के संदर्भ में और विधान सभा के संदर्भ में|

बिल के संदर्भ में: बिधेयको को मंजूरी के लिये राज्यपाल के पास जाना पड़ता है वो बिल पर सहमति दे सकता है, बिल को अपने पास रख सकता है, बिल को सदनों में पुनर्विचार के लिए दे सकता है परंतु विधान सभा के द्वारा संशोधित या बिना संशोधन के फिर से बिल पारित कर दिया जाये, तो उसे अपनी सहमति देनी पड़ती है या राष्ट्रपति के विचार के लिए बिल को आरक्षित कर लेता है|

धन विधेयको द्वारा भेजे गये बिल को राज्यपाल वापस नही भेज सकता है क्योंकि विधेयक केवल राज्यपाल की पूर्व सहमति के साथ ही पेश किया जाते हैं| राष्ट्रपति द्वारा विधेयक को सम्मानित किया जाता है तो राष्ट्रपति ये जान सकता है की राज्यपाल अपनी सहमति दे रहा है या अपनी सहमति पर रोक लगा रखी है|

विधान सभा के संदर्भ में: राज्यपाल के पास राज्य विधानसभा स्थगित करने का अधिकार होता है जो विधान सभा को भंग कर सकता है जब वह अपना बहुमत खो देता है (अनुच्छेद176 )|

वित्तीय अधिकार

  • वह सालीना वित्तीय विवरण (राज्य का बजट) विधानसभा के सामने रखता है|

  • धन विधेयक केवल राज्य विधानसभा में इसकी पूर्व अनुशंसा से ही पेश किया जा सकता है

  • अनुदान के लिए कोई भी मांग नहीं की जा सकती (जब तक उसकी अनुशंसा न हो)|

  • व्यय को पूरा करने के लिए निधि से पैसा राज्यपाल की अनुरोध के बाद ही निकाला जा सकता है|

  • वह नगरपालिका और पंचायतों की समीक्षा करने के लिए हर 5 साल में वित्त आयोग का गठन करता है

न्यायिक अधिकार

राष्ट्रपति संबन्धित राज्य के राज्यपाल से सलाह करता है जब भी उसे राज्य उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को नियुक्त करना हो|

माफी के अधिकार

  • माफ़ी –किसी भी अपराधी को पूरी तरह दोषमुक्त करना चाहिए

  • फांसी स्थगित करना सजा के प्रक्रिया पर रहना

  • राहत देना किसी भी परिस्थितियों में कम सजा की राहत प्रदान करना

  • छूट देना सजा के चरित्र को बदले के कारण सज़ा में छूट देना

  • प्रारूप बदल देना – सज़ा के एक रूप को दूसरे से बदल देना|

विवेकाधीन अधिकार, अध्यादेश लेने का अधिकार

राज्यपाल का निष्कासन

केंद्र सरकार को राष्ट्रपति की सहमती पर किसी भी राज्य के राज्यपाल को हटाने का अधिकार है, यहाँ तक की उसे हटाये जाने के कारण बताए बिना| इन अधिकारों का जबरन प्रयोग नहीं किया जा सकता। इनका प्रयोग असामान्य और असाधारण परिस्थितियों में वैध और मजबूरी के कारण किया जा सकता है|

एक मात्र कारण कि राज्यपाल के विचार व नीतियाँ राज्य सरकार से भिन्न है या और केंद्र सरकार ने उसमे अपना विश्वास खो दिया है, राज्यपाल के निष्कासन का कारण नहीं बन सकता|

केंद्रीय सरकार में परिवर्तन उसके निष्कासन का कारण नहीं बन सकते

एक राज्यपाल को हटाने के अदालत में चुनौती दी जा सकती है।अदालत केंद्र सरकार से साक्ष्य प्रस्तुत करने को कह सकती है जिसे द्वारा लिया जाने वाला निर्णय बाध्यकारी कारणों को सिद्ध करने के लिए|

मुख्यमंत्री का राज्यपाल से सम्बन्ध

मुख्यमंत्री कर्मचारी होता है, राज्यपाल के अधिकारियों के बीच में एक मुखिया होता है। एक राज्य में वही होता है जो देश में प्रधानमंत्री का होता है। एक मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त होने वाली विशेषताओं का वर्णन नहीं करना चाहिए हमारे संविधान के अनुच्छेद 167 के तहत राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मंत्रियों की बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करता है।

मुख्यमंत्री वास्तविक कार्यकारी होता है, राज्यपाल के द्वारा अधिकारियों का एक मुखिया होता है। उसकी स्थित या पद एक राज्य में वहीं होता है जो देश में प्रधानमंत्री का होता है।

मुख्यमंत्री की नियुक्ति

हमारे देश के संविधान में एक मुख्यमंत्री की विशेषताओं का स्पष्ट रूप से वर्णन नहीं किया गया है।

शक्तियां और कार्य मुख्यमंत्री की शक्तियों और कार्यों को इसप्रकार विभाजित किया गया है

  • मंत्रियों परिषद के गठन का अधिकार

  • एक मंत्री के रूप में व्यक्ति को नियुक्त करने के लिए राज्यपाल को सलाह दे सकता है। केवल मुख्यमंत्री की सलाह के अनुसार ही राज्यपाल मंत्रियों की नियुक्ति करते हैं।

  • वह अपने अनुसार किसी सी समय मंत्रियों और विभागों के बीच आबंटन और फेरबदल कर सकता है।

  • राय/विचारों के मामले में वह मंत्री को इस्तीफा देने के लिए कहा जा सकता है, वह इस्तीफा नहीं देता है तो मुख्यमंत्री उसे बर्खास्त करने के लिए राज्यपाल को सलाह दे सकते हैं।

  • वह सभी मंत्रियों का निर्देशन, मार्गदर्शन देने के साथसाथ सभी गतिविधियों को नियंत्रित करता है।

  • प्रधानमंत्री किसी भी मंत्री की नियुक्ति के साथ से ही वह उसके इस्तीफा देने या मौत की स्थिति में ही पूरी मंत्रिपरिषद को रद्द किया जा सकता है।

आज आपने क्या सीखा

दोस्तों मुझे उम्मीद हैं कि आप को ये आर्टिकल “राज्यपाल के कार्य और शक्तिया ” पसंद आया होगा. और भारत के राज्यों के राज्यपाल के कार्य और शक्तिया के बारे में जानने के बाद आप की जानकारी भी बढ़ी होगी.
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